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हजारों श्रद्धालुओं के जयघोष, उल्लास ढोल नगाड़ो के साथ विराजित हुए देवता

हजारों श्रद्धालुओं के जयघोष, उल्लास ढोल नगाड़ो के साथ विराजित हुए देवता

जसोलधाम में गाजे-बाजे के साथ मन्दिर शिखर पर चढ़ाई कलश ध्वजा

नौ दिनों तक मंदिर प्रांगण में रामकथा, कन्या पूजन सहित अनेक कार्यक्रम हुए आयोजित

जसोल- नवनिर्मित जसोलधाम में श्री सवाईसिंहजी, श्री लालबन्नासा, श्री बायोसा, श्री खेतलाजी व श्री भेरूजी के मंदिर के नौ दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव गुरूवार को हर्षोल्लास धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ। नौ दिनों तक मंदिर प्रांगण में कन्या पूजन, गौपूजन, रामकथा, यज्ञ, कलश यात्रा, मूर्ति नगर भ्रमण के साथ विभिन्न प्रकार के पूजन, मूर्ति परिक्रमा सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठान किए गए। अंतिम दिन मंदिर प्रतिष्ठा के मुख्य कार्यक्रम शिल्पी पूजन, वास्तु पूजन, कलश, ध्वजा, पूजन स्थापन, मूर्ति प्रवेश, स्थिरी करण कार्यक्रम का आयोजन किया।  तथा प्रतिष्ठा की पूर्णाहुति की गई। सन्तो के पावन सानिध्य में हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के जयघोष, उल्लास ढोल नगाड़ो के बीच मंदिर में श्री सवाईसिंहजी, श्रीलालबन्नासा, श्री बायोसा, श्री खेतलाजी व श्री भेरूजी की प्रतिष्ठा स्थापित की गई। गुरूवार को सुबह कुटीर हवन का आयोजन किया गया। उसके बाद यज्ञ में पूर्णाहुति की गई। बाद में संत सम्मान व आशीर्वचन कार्यक्रम हुआ। मंदिर शिखर पर ध्वजा चढ़ाने के लिए पूजन किया गया। बाद में गाजे-बाजे के साथ शिखर पर कलश ध्वजा मन्दिर संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल, ट्रस्टी कर्नल शम्भूसिंह देवड़ा ने सभी भक्तों की ओर से स्थापित किया। पंडित अभिषेक जोशी के साथ विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर में सवा बारह बजे मूर्ति स्थापित की गई। दोपहर को महाआरती आरती की गई। बाद में भोजन प्रसादी का आयोजन कर श्रद्धालुओं में वितरण किया गया। प्रबन्ध कमेटी सदस्य फ़तेहसिंह ने बताया कि पं. गिरीश कुमार द्वारा कन्या पूजन करवाया गया। जिसमें कन्या पूजन व भोजन प्रसादी का लाभ चंद्रेश कुमार राठी, आसाराम दिग्गा, रामेश्वर भूतड़ा, अशोक राठी, घनश्याम राठी व रामकृष्ण ग्रुप ने लिया। 

बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु :-
प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवक शुरू हो गई, जो देर शाम तक जारी रही। दिन भर चले धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मंदिर में दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। पिछले दिनों हुए अनुष्ठान में भी श्रद्धालुओं ने उत्साह पूर्वक भाग लिया।

साधु-संतों का रहा सानिध्य, हुआ संत समागम : -
प्रतिष्ठा कार्यक्रम में दुधेश्वरमठ गाजियाबाद महंत नारायणगिरी महाराज, महंत सैनाचार्य अचलानंद गिरी महाराज, कनाना श्री मठ परशुराम गिरी महाराज, सिवाना मठ नृत्य गोपालराम महाराज, लेटा मठ रणछोड़ भारती महाराज, परेऊ मठ ओंकार भारती महाराज, वरिया मठ गणेशपुरी महाराज, दिनेश गिरी महाराज जसोल सहित दर्जनों साधु-संतों का सानिध्य रहा। 
भक्तिमय बना माहौल :- 
श्रद्धालुओं की जयघोष ढोल नगाड़ो के बीच दिनभर माहौल भक्तिमय बन रहा। इस दौरान पुष्पवर्षा की गई। श्रद्धालुओं ने श्री सवाईसिंहजी, श्री लालबन्नासा, श्री बायोसा,  श्री खेतलाजी व श्री भेरूजी के जयकारे लगाए। प्रतिमा स्थापना के बाद साधु-संतो, अतिथियों ने पूजा-अर्चना की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने घंटों कतार में खड़े रहकर दर्शन कर घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की। दिनभर मंदिर स्थल पर श्रद्धालुओं की रेलमपेल लगी रही। क्षेत्र के साथ अनेक जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचे।
रामकथा के जीवन पर महत्व पर प्रकाश की कही बात : - 
श्री राणी भटियाणी मन्दिर संस्थान द्वारा जसोल धाम में आयोजित हो रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन पंडित अभिषेक जोशी ने कहा कि जीवन मे रामकथा  विशेष महत्व रखती है। सत्य का महत्व तब ही है जबकि सत्य को जीवन में मन, वचन, कर्म से स्वीकार किया जाए। सत्य का आचरण करने वाला व्यक्ति ही सामाजिक जीवन में प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्राप्त करता है। सत्य के आचरण के आधार पर ही हम एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं। परस्पर विश्वास की नींव पर ही संपूर्ण समाज की रचना टिकी हुई है। उन्होंने प्रभु श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में मुसीबतों का सामना करते हुए समाज के सामने ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जिसके अनुसरण से मनुष्य का जीवन सफल हो सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म मात्र बौद्धिक उपलब्धि नहीं है। वह मनुष्य की स्वाभाविक आत्मा है और मनुष्य के आवरण से ढकी हुई है। इस कारण वह अज्ञात है। आवरण से उसका चैतन्य ढका हुआ है, लेकिन वह अस्त नहीं है। रामकथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अकेले प्रार्थना करने से हो सकता है कि परमात्मा कुछ देर में सुने, लेकिन जब एक साथ लाखों हाथ जुड़कर प्रार्थना करते हैं तो परमात्मा को सुनना ही पड़ता है। 
पुलिस प्रशासन की माकूल व्यवस्था : -
प्रतिष्ठा को लेकर मंदिर स्थल पर शांति कानून व्यवस्था को लेकर पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रशासन व पुलिस की माकूल व्यवस्था के बीच प्रतिष्ठा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। आने-जाने वाले श्रद्धालुओं से शांति व्यवस्था बनाए रखने का आह्वान किया। मंदिर के अंदर बाहर पुलिस जाब्ता तैनात रहा।